National youth Day: भारत को जागृत करते स्वामी विवेकानन्द

स्वामीजी अंग्रेजी परतन्त्रता से मुक्ति के आह्वान के साथ ही भारतीय चेतना के स्वातन्त्र्य की बात भी कहते हैं। उनके अनुसार स्वाधीनता ही विकास की पहली शर्त है। अब स्वाधीनता का अभिप्राय क्या है? क्या केवल भौतिक स्वतन्त्रता, या आध्यात्मिक स्वतन्त्रता? id="ram"> कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल| उठो, उठो, लम्बी रात बीत रही है, सूर्योदय का प्रकाश

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खबरों का ‘तालिबानीकरण’ यानी प्रतिरोध को नपुंसक बनाने का षड्यंत्र!

देश के नागरिक इस वक्त एक नए प्रकार के ‘ऑक्सीजन’ की कमी के अदृश्य संकट का सामना कर रहे हैं। आश्चर्यजनक यह है कि ये नागरिक सांस लेने में किसी प्रकार की तकलीफ़ होने की शिकायत भी नहीं कर रहे हैं। मज़ा यह भी है कि इस ज़रूरी ‘ऑक्सीजन’ की कमी को नागरिकों की एक स्थायी आदत में बदला जा रहा है। id="ram"> श्रवण गर्ग| पुनः संशोधित शनिवार, 18 सितम्बर 2021 (01:28 IST) देश के नागरिक इस वक्त एक

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राम की अयोध्या में गायें बेहाल, भूख से तोड़ रही हैं दम...

अयोध्या। आज कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी के चलते जहां एक तरफ देश में हजारों लोगों की जानें रोजाना जा रही हैं, लोग इससे बेहाल होते जा रहे हैं, उनकी मुश्किल दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, यह स्थिति कब तक ऐसी ही बनी रहेगी यह किसी को नहीं पता। केंद्र व प्रदेश की सरकारें इस पर रोकथाम लगाने में अभी सफल नहीं हो पा रही हैं वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा संचालित गौशालाएं, जहां पर बेज़ुबान जानवरों, सड़क पर घूमते जानवरों को प्रदेश सरकार के निर्देश पर पकड़कर रखा जाता है, जिनकी हालत भी बदतर होती जा रही है, इसमें रहने वाले बेज़ुबान जानवर भूखे-प्यासे मर रहे हैं। id="ram"> संदीप श्रीवास्तव| पुनः संशोधित शुक्रवार, 28 मई 2021 (17:58 IST) अयोध्या। आज

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द व्हाइट टाइगर के लेखक अरविंद अडिगा के बारे में खास बातें

'द व्हाइट टाइगर फिल्म ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो चुकी है। यह फिल्म लेखक अरविंद अडिगा की किताब पर आधारित है। अरविंद अडिगा एक पत्रकार के रूप में पहचाना जाने वाला नाम था फिर भारतीय साहित्यप्रेमियों के लिए इस नाम ने उम्मीद के विशाल द्वार खोल दिए। अरविंद अडिगा को वर्ष 2008 का साहित्य का बुकर पुरस्कार मिला। वे भारतीय मूल के उपन्यासकार हैं। id="ram"> स्मृति आदित्य| द व्हाइट टाइगर फिल्म ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो चुकी है।

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इस बार भी एग्जिट पोल हमेशा की तरह बकवास साबित हुए

एक बार फिर साबित हुआ कि किसी भी चुनाव में मतदान का सिलसिला खत्म होने के बाद टीवी चैनलों पर दिखाए जाने वाले एग्जिट पोल की कवायद पूरी तरह बकवास होती है। पश्चिम बंगाल के मामले में लगभग सभी टीवी चैनलों और सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल औंधे मुंह गिरे हैं। हालांकि तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव नतीजे एग्जिट पोल्स के अनुमानों के मुताबिक ही आए हैं लेकिन विभिन्न दलों या गठबंधनों को मिली सीटों की संख्या एग्जिट पोल्स के अनुमानों से बिल्कुल अलग है। id="ram"> अनिल जैन| पुनः संशोधित गुरुवार, 6 मई 2021 (16:39 IST) एक बार फिर साबित हुआ कि किसी भी

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#Rippedjeans: नाम ‘तीरथ’ है तो लगा था सोच में भी ‘पुण्‍याई’ होगी

उम्‍मीद की जानी जाहिए थी कि अगर नाम ‘तीरथ’ है तो सोच में थोड़ी ‘पुण्‍याई’ तो होगी ही, लेकिन ऐसा नहीं है। नाम और चरित्र में कोई संबंध नहीं होता। id="ram"> नवीन रांगियाल| जब किसी एक का विरोध कर के उसे कुर्सी से हटाया जाता है तो यह तय

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सुहाना सफर और ये मौसम हंसीं- कहां गुम हो गए ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार...!

वो हिन्दी फिल्मों के ट्रेजेडी किंग थे। वो हिन्दी फिल्मों की नई ऊंचाइयों के दौर के लीजेंड यानी महान चरित्र अभिनेता थे। नए दौर की फिल्मों के बेहतरीन कलाकार, बेहद अनुशासित और जिम्मेदार शख्सियत थे। id="ram"> ऋतुपर्ण दवे| वो हिन्दी फिल्मों के ट्रेजेडी किंग थे। वो हिन्दी फिल्मों की नई

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'स्मृति' के बहाने विभाजन के दंश को स्थाई बनाने की जुगत!

मेरे पिछले आलेख 'विभाजन की विभीषिका को याद करने का मकसद क्या है?' (21 अगस्त) को लेकर जो प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं हैं, उनमें कुछ वाक़ई परेशान करने वाली हैं। इन प्रतिक्रियाओं में न सिर्फ़ अगस्त 1947 के विभाजन की विभीषिका का स्मरण करने की वकालत ही की गई है और बताया गया है कि किस तरह से बहुसंख्यक वर्ग के लोगों के साथ तब अत्याचार हुए थे, उससे भी आगे जाकर वर्ष 1946 के 16 अगस्त की भी याद दिलाई गई है। इस दिन कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुई साम्प्रदायिक विद्वेष की (‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के रूप में जानी जाने वाली) घटना की हाल के सालों में कभी कहीं चर्चा नहीं की गई, पर अब प्रचारित की जा रही है यानी स्मृति दिवस मनाने की भूमिका शायद 14 अगस्त पर ही ख़त्म नहीं होने वाली है। id="ram"> श्रवण गर्ग| Last Updated: शनिवार, 28 अगस्त 2021 (00:12 IST) मेरे पिछले आलेख 'विभाजन की

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यात्रा वृत्तांत : उदयपुर का वैभवशाली और शौर्य से भरा इतिहास

म्हारा राजस्थान। नाम सुनते ही अभूतपूर्व, वैभवशाली इतिहास के कई सुनहरे पन्नों से स्वत: ही साक्षात्कार होता है। साकार हो उठते हैं रणभूमि में खड़े कतारबद्ध वे रणबांकुरे, जो अपनी रगों में बहने वाले राजपुताना रक्त की आन के लिए अपने को न्योछावर करने के लिए तत्पर रहते थे। id="ram"> अंजू निगम| म्हारा राजस्थान। नाम सुनते ही अभूतपूर्व, वैभवशाली इतिहास के कई

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दो जलेबी और एक पेप्सी का शौक़ीन यह फ़नकार अंत तक अपने 'एटीट्यूड' में रहा

उस्ताद बिस्मिल्लाह बिहार के डुमरांव में राजघराने के नौबतखाने में शहनाई बजाने वाले परिवार में पैदा हुए थे। शहनाई बजाना उनका खानदानी पेशा रहा। उनके वालिद पैगंबरबख़्श ख़ान उर्फ़ बचई मियां राजा भोजपुर के दरबार में शहनाई बजाते थे और उनके मामू अली बख़्श साब बनारस के बाबा विश्वनाथ मंदिर के नौबतखाने में शहनाई बजाते थे। बस यहीं से उस्ताद ने भी बाबा विश्वनाथ की संगत कर ली और मंदिर के आंगन को अपने रियाज की जगह मुकम्मल कर लिया। id="ram"> नवीन रांगियाल| (जन्म 21 मार्च 1916, अवसान 21 अगस्त 2016) वो उस्ताद हुए, खां साहब भी और

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