नीले घन को चीरकर, झाँक रहा देखो दिनकर

नीले घन को चीरकर, झाँक रहा देखो दिनकर। दोनों बाहों को फैलाकर , जीवन पाता मैं प्रबल-प्रखर, रश्मिकर ही तो है सुखकर, पोषित करता सब पूरित कर। जीवों को साँस दिलाने को झाँक रहा देखो दिनकर। id="ram"> प्रीति दुबे| सृष्टि नियंता -सूर्य googletag.cmd.push(function() { googletag.display('WD_HI_ROS_Left_336x280'); if

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एक मुल्क था अफ़ग़ानिस्तान!

हैं परेशान इन दिनों बहुत सारी चीजों को लेकर हम! मसलन, क्या करना चाहिए हमें- नहीं बचे जब अपना ही देश हमारे पास! कहाँ पहुँचना चाहिए तब हमें? id="ram"> श्रवण गर्ग| पुनः संशोधित मंगलवार, 7 सितम्बर 2021 (01:20 IST) हैं परेशान इन दिनों

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अटल जी की कविता : हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय

हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय! मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार-क्षार। डमरू की वह प्रलय-ध्वनि हूं जिसमें नचता भीषण संहार। id="ram"> मैं शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार-क्षार। डमरू की वह प्रलय-ध्वनि

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निदा फाजली के बेहतरीन दोहे..., यहां पढ़ें

निदा फाजली का जन्म ग्वालियर में 12 अक्टूबर 1938 को हुआ था। 'निदा फाजली' यह उनके लेखन का नाम है। उनका असली नाम मुक्तदा हुसैन है। यहां प्रस्तुत हैं उनके कुछ मशहूर दोहे- id="ram"> Nida Fazli निदा फाजली का जन्म ग्वालियर में 12 अक्टूबर 1938 को हुआ था। 'निदा

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अटल बिहारी वाजपेयी की 5 श्रेष्ठ कविताएं, यहां पढ़ें

मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना, गैरों को गले न लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना। id="ram">   न मैं चुप हूं, न गाता हूं   सवेरा है, मगर पूरब दिशा में घिर रहे बादल,

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शहीद भगत सिंह के वो 7 शेर, जिन्हें सुनकर खून में रवानी महसूस होने लगेगी

जीते जी क्रांति करने वाले भगत सिंह के लिखे हुए शेर उनके बाद भी क्रांति पैदा करने की ताकत रखते हैं। देश के प्रति उनका प्रेम, दीवानगी और मर मिटने का भाव, उनकी शेर और कविताओं में साफ नजर आता है, एक बार पढ़ेंगे तो खून में देशभक्‍ति महसूस होने लगेगी। id="ram"> Last Updated: मंगलवार, 23 मार्च 2021 (12:32 IST) आज 23 मार्च को शहीद दिवस है। यही वो दिन है, जब देश

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वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता : भगत सिंह के 7 शेर, आज भी जोश भर सकते हैं युवाओं में

देश के प्रति उनका प्रेम, दीवानगी और मर मिटने का भाव, उनके शेर-ओ-शायरी और कविताओं में साफ दिखाई देता है, जो आज भी युवाओं में आज भी जोश भरने का काम करता है। पढ़ें भगत सिंह के वतन पर लिखे यह 7 शेर - id="ram"> देश के लिए मर मिटने वाले देशभक्तों में भगत सिंह का नाम भुलाया नहीं जा सकता।

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संत कबीर दास के दोहे : आज भी हैं प्रासंगिक

संत कबीर दास के दोहे आज भी पथ प्रदर्शक के रूप में प्रासंगिक है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं कबीर के दोहे सर्वाधिक प्रसिद्ध व लोकप्रिय दोहे- id="ram"> संत कबीर दास के दोहे आज भी पथ प्रदर्शक के रूप में प्रासंगिक है। यहां पाठकों

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कबीर पर एक उम्दा गज़ल : हर एक हर्फ को खुशबू में फिर भिगोते हैं

हर एक लफ्ज जो अपने लहू से धोते हैं हर एक हर्फ को खुशबू में फिर भिगोते हैं न हो मुश्क तो मुअत्तर(भीगा) है ये पसीने से इन्हीं के दम से जमाने जमाने होते हैं इन्हीं के नाम से जिंदा है ताबे-हिन्दुस्तां इन्हीं के नाम नए सूरज उजाले बोते हैं id="ram"> सेहबा जाफ़री| हर एक लफ्ज जो अपने लहू से धोते हैं हर एक हर्फ को खुशबू में फिर

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आखि‍र क्‍या होती है लुप्त होती जा रही काव्य विधा ‘कह मुकरी’?

अमीर खुसरो ने इस विधा पर बहुत काम किया। उनकी कई कह-मुकरियां बहुत प्रसिद्ध हैं। पर समय के साथ अन्य शास्त्रीय छंदों एवं नई कविता के आ जाने से इसका सृजन कम होने लगा और अब तो अनेक नए कवि इस सुंदर विधा का नाम तक नहीं जानते। id="ram"> तृप्ति मिश्रा| हो सकता है आज के कई युवा साहित्यकारों ने "कह मुकरी" विधा का

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