मधुदीप: राम नाम जपते रहे और काम करते रहे

मधुदीप ने देश में जहां एक ओर लघुकथा सृजन की नई पीढ़ी तैयार की वहीं दूसरी ओर लघुकथा के आलोचक भी तैयार किए। यानी दिशा प्रकाशन का नाम सार्थक सिद्ध करने में मधुदीप ने लघुकथा की हर दिशा में प्राण प्रण से कार्य किया है। id="ram"> Last Updated: शनिवार, 15 जनवरी 2022 (13:52 IST) स्मृति शेष डॉ. पुरुषोत्तम दुबे, दिशा प्रकाशन

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ULLU पर Cyanide : प्यार और अपराध में छिपे साइनाइड किलर के डार्क सीक्रेट्स

ULLU एप्प पर 19 नवंबर को Cyanide साइनाइड स्ट्रीमिंग होने जा रही है जिसकी कहानी अपराध और सेक्स के इर्दगिर्द घूमती है। प्यार, वासना, लालच, नफरत यदि जरूरत से ज्यादा हो जाए तो जहर बन जाता है कुछ ऐसा ही होता है मोहन के साथ। मोहन के बचपन में उसे सौतेली मां के पास छोड़ जाते हैं जहां ऐसा कुछ घटता है कि मोहन में नफरत भर जाती है।

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सात दिवस का एक सप्ताह : मजेदार कविता

आमतौर पर एक माह में 4 सप्ताह आते हैं...और एक सप्ताह में सात दिन होते हैं.... आइए पढ़ते हैं एक मजेदार कविता id="ram"> कृष्ण वल्लभ पौराणिक| एक माह में 4 सप्ताह आते हैं...और एक सप्ताह में सात दिन

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जय वर्मा की कहानियां: ‘सात कदम’ में सात समन्दर पार करती कहानियां

घर छोड़ते वक्त उसके मन में एक अजीब सा डर भी होता है, लेकिन ‘डार्क रूम’ (आर.के. नारायण) की भारतीय नायिका सावित्री की तरह वह घर और बच्चों की चिंता में नहीं रहती है, न ही वापस लौटती है; वह बस नये जीवन की तलाश में आगे बढ़ती जाती हैं। id="ram"> सारिका गुप्ता| कहानियां ज़िन्दगी को थोड़ा और बड़ा कर देती हैं। कहानियों का

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चार अधूरी बातें : अधूरी कहानियों का पूरा उपन्यास

समाज की 4 बड़ी बुराइयां,4 युवतियां और उनकी 4 अधूरी कहानियां....'चार अधूरी बातें' युवा लेखक अभिलेख द्विवेदी का लघु उपन्यास है। अधूरी इसलिए क्योंकि अभिलेख के अनुसार पूरापन सब लिखते हैं। बिना किसी पूर्व भूमिका के उपन्यास संदली नामक किरदार से आरंभ होता है और संजीदा, संयुक्ता व संध्या की कहानियों के साथ समाप्त होता है। इन चार किरदारों की काउंसलिंग के सेशन के माध्यम से कथा आगे बढ़ती है और परत दर परत पाठक के भीतर उतरती है। id="ram"> स्मृति आदित्य| अधूरी कहानियों का पूरा उपन्यास समाज की 4 बड़ी बुराइयां,4

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हिंदी दिवस पर कविता : संस्कृत की लाड़ली बेटी महान है हिंदी

भारतीय अधरों का... गौरव और मान है हिंदी, भारत की प्रमुख पहचान और सम्मान है हिंदी ! फ़ारसी से उपजी,संस्कृत की लाड़ली बेटी महान है हिंदी, भारत की मुख्य भाषा और अभिमान है हिंदी ! id="ram"> डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र| भारतीय अधरों का... गौरव और मान है हिंदी, भारत की

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प्रसिद्ध साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र के बारे में 10 दिलचस्प तथ्य

भारतेंदु हरिशचंद्र एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्‍यकार थे। वह बचपन से ही महान थे। उनका जन्‍म 9 सिंतबर 1850 ई में वाराणसी, यूपी में हुआ था। उनके पिता का नाम गोपालचंद्र था। एक साहित्‍य में उनका नाम गिरिधरदास लिखा गया था इसके बाद से वह इस नाम से प्रसिद्ध हो गए। गोपालचंद्र एक प्रसिद्ध कवि थे। वहीं माता का नाम पार्वती देवी था। मात्र 5 वर्ष की आयु में मां का साया उठ गया था। सौतेली मां को भारतेंदु से विशेष लगाव नहीं था। वहीं 10 वर्ष की आयु में पिता का साया भी उठ गया। भारतेंदु का ख्‍याल कालीकदमा दाई और तिलकधारी नौकर मिलकर रखते थे। हिंदी साहित्‍य के एक युग कहे जाने वाले भारतेंदु के जन्‍मदिवस के उपलक्ष्‍य में जानते हैं उनके बारे में 10 रोचक बातें - id="ram"> भारतेंदु हरिशचंद्र एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्‍यकार थे। वह बचपन से ही

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The Alchemist: वो किताब जो ‘सपनों’ को हासिल करने की यात्रा को इतना मजेदार बना देगी कि ‘मंजिल’ याद नहीं रहेगी

इस पंक्‍ति की गहराई में जो अर्थ छुपा है वो यही कहता है कि आप किसी चीज को अपने दिल, दिमाग और अपनी पूरी आत्‍मा से चाहोगे तो यह सृष्‍ट‍ि, यह प्रकृति या यह कुदरत भी उसे हासिल करने में आपकी पूरी मदद करने लगेगी। फि‍र चाहे वो कोई इरादा हो, कोई मकसद या फि‍र आपके जीवन का कोई उदे्दश्‍य ही क्‍यों न हो। id="ram"> नवीन रांगियाल| Last Updated: गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021 (15:17 IST) ‘जब तुम वास्तव में किसी

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अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस : अनुवादक भाषायी-दूत हैं

अनुवाद दो भाषाओं के बीच मैत्री का पुल है। वे कहते हैं- ”अनुवाद एक भाषा का दूसरी भाषा की ओर बढ़ाया गया मैत्री का हाथ है। वह जितनी बार और जितनी दिशाओं में बढ़ाया जा सके, बढ़ाया जाना चाहिए।” id="ram"> डॉ० शिवन कृष्ण रैना हर भाषा की अपनी एक अलग पहचान होती है। भाषा की यह पहचान

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पर्यावरण दिवस पर वामा साहित्य मंच का अनूठा आयोजन : नदियों को सहेजें, नदियां हैं अनमोल

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वामा साहित्य मंच ने बात की देश की प्रमुख नदियों पर.....उनके संरक्षण पर...उनके पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व पर..ऑनलाइन सम्पन्न इस आयोजन में जब 25 के करीब नदियों की धारा बही तो हर कोई उसमें भीग कर आनंदित और संकल्पित हो उठा.... id="ram"> विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वामा साहित्य मंच ने बात की देश की प्रमुख

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