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योगिनी एकादशी व्रत के 7 चमत्कारिक फायदे

माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं। आषाढ़ माह में योगिनी और देवशयनी एकादशी आती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार योगिनी एकादशी का व्रत 5 जुलाई को है। - योगिनी एकादशी व्रत के 7 चमत्कारिक फायदे id="ram"> अनिरुद्ध जोशी| हमें फॉलो करें माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह

  • Posted on 23rd Jun, 2022 12:36 PM
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माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं। में योगिनी और देवशयनी एकादशी आती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार योगिनी एकादशी का व्रत 24 जून को है।


1. योगिनी एकादशी से समस्त पाप दूर हो जाते हैं और व्यक्ति पारिवारिक सुख पाता है।

2. यह व्रत सभी उपद्रवों को शांत कर सुखी बनाता है।

3. योगिनी एकादशी का व्रत करने से समृद्धि की प्राप्ति होती है।

4. माना जाता है कि इस व्रत को करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
5. यह व्रत तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। इस व्रत को विधित रखने से सिद्धि और सफलता मिलती है।

6. कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिए हुए श्राप का निवारण हो जाता है।

7. यह एकादशी समस्त आधि-व्याधियों को नष्ट कर सुंदर रुप, गुण और यश देने वाली कही गई है।

योगिनी एकादशी व्रत की कथा :
अलकापुरी के राजा यक्षराज कुबेर के यहां हेम नामक एक माली कार्य करता था। उस माली का कार्य प्रतिदिन भगवान शिव के पूजन हेतु मानसरोवर से फूल लाना था। एक दिन उसे अपनी पत्नी के साथ रमण करने के कारण फूल लाने में बहुत देर हो गई। वह कुबेर की सभा में विलंब से पहुंचा। इस बात से क्रोधित होकर कुबेर ने उसे कोढ़ी हो जाने का श्राप दे दिया।

श्राप के प्रभाव से हेम माली इधर-उधर भटकता रहा और भटकते-भटकते वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। ऋषि ने अपने योगबल से उसके दु:खी होने का कारण जान लिया। यह जानकर ऋषि ने उससे कहा कि योगिनी एकादशी का व्रत करो तो श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। माली ने विधिवत रूप से योगिनी एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से हेम माली का कोढ़ समाप्त हो गया।

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