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दिवाली पर सूर्यग्रहण का साया : जानिए कब और कैसे मनाएं दीपों का पर्व

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  • Posted on 23rd Sep, 2022 14:12 PM
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हिंदू पंचांग के मुताबिक दीपावली का त्‍योहार कार्तिक माह की अमावस्‍या को मनाया जाता है, लेकिन इस बार अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण है। ग्रहण काल में कैसे कोई त्योहार मनाया जा सकता है? 25 अक्टूबर को अमावस्या रहेगी। सूर्य ग्रहण का समय- 25 अक्टूबर को शाम 04.29 मिनट पर शुरू होकर शाम 05.42 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में दीपावली की तिथि को लेकर मन में संशय है। - When and how to celebrate Diwali, the festival of lights id="ram"> Last Updated: शुक्रवार, 23 सितम्बर 2022 (16:34 IST) हमें फॉलो करें हिंदू पंचांग के मुताबिक

Last Updated: शुक्रवार, 23 सितम्बर 2022 (16:34 IST)
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हिंदू पंचांग के मुताबिक दीपावली का त्‍योहार कार्तिक माह की अमावस्‍या को मनाया जाता है, लेकिन इस बार अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण है। ग्रहण काल में कैसे कोई त्योहार मनाया जा सकता है? 25 अक्टूबर को अमावस्या रहेगी। सूर्य ग्रहण का समय- 25 अक्टूबर को शाम 04.29 मिनट पर शुरू होकर शाम 05.42 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में दीपावली की तिथि को लेकर मन में संशय है।

दीपावली कब है- Diwali kab hai 2022 : कार्तिका मास की अमावस्या को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह पर्व 24 अक्टूबर सोमवार को मनाया जाएगा और 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण रहेगा। पंचांग भेद से 25 अक्टूबर को भी अमावस्या रहेगी। दरअसल 24 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि शाम 05:29:35 बजे तक रहेगी इसके बाद अमास्या प्रारंभ हो जाएगी, जो अगले दिन 25 अक्टूबर को 04:20:38 पीएम तक रहेगी।

कहां दिखाई देगा (solar eclipse visible) : भारत के साथ-साथ विश्व के कई देशों में दिखाई पड़ेगा। इसका प्रभाव भारत में बेहद आंशिक रहेगा, अत: सूतक मान्य नहीं रहेगा।
गोवर्धन पूजा : दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा है और इसी दिन सूर्य ग्रहण है। चूंकि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा तो उसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसलिए गोवर्धन पूजा का त्‍योहार मनाने में को हर्ज नहीं है।

कैसे मनाएं दीपों का पर्व । When and how to celebrate Diwali

- लिपाई-पुताई : वर्षा के कारण गंदगी होने के बाद संपूर्ण घर की सफाई और लिपाई-पुताई करना जरूरी होता है। मान्यता के अनुसार जहां ज्यादा साफ-सफाई और साफ-सुथरे लोग नजर आते हैं, वहीं लक्ष्मी निवास करती हैं।
- वंदनवार : आम या पीपल के नए कोमल पत्तों की माला को वंदनवार कहा जाता है। इसे अकसर दीपावली के दिन द्वार पर बांधा जाता है। वंदनवार इस बात का प्रतीक है कि देवगण इन पत्तों की भीनी-भीनी सुगंध से आकर्षित होकर घर में प्रवेश करते हैं।

- रंगोली : रंगोली या मांडना को 'चौंसठ कलाओं' में स्थान प्राप्त है। उत्सव-पर्व तथा अनेकानेक मांगलिक अवसरों पर रंगोली से घर-आंगन को खूबसूरती के साथ अलंकृत किया जाता है। इससे घर-परिवार में मंगल रहता है।
- दीपक : पारंपरिक दीपक मिट्टी का ही होता है। इसमें 5 तत्व हैं- मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु। हिन्दू अनुष्ठान में पंच तत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।

- चांदी का ठोस हाथी : विष्णु तथा लक्ष्‍मी को हाथी प्रिय रहा है इसीलिए घर में ठोस चांदी या सोने का हाथी रखना चाहिए। ठोस चांदी के हाथी के घर में रखे होने से शांति रहती है और यह राहू के किसी भी प्रकार के बुरे प्रभाव को होने से रोकता है।
- कौड़ियां : पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। कुछ सफेद कौड़ियों को केसर या हल्दी के घोल में भिगोकर उसे लाल कपड़े में बांधकर घर में स्थित तिजोरी में रखें। ये कौड़ियां धनलक्ष्मी को आकर्षित करती हैं।

- चांदी की गढ़वी : चांदी का एक छोटा-सा घड़ा, जिसमें 10-12 तांबे, चांदी, पीतल या कांसे के सिक्के रख सकते हैं, उसे गढ़वी कहते हैं। इसे घर की तिजोरी या किसी सुरक्षित स्थान पर रखने से धन और समृद्धि बढ़ती है। दीपावली पूजन में इसकी भी पूजा होती है।
Lakshmi mantra
- मंगल कलश : एक कांस्य या ताम्र कलश में जल भरकर उसमें कुछ आम के पत्ते डालकर उसके मुख पर नारियल रखा होता है। कलश पर रोली, स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर उसके गले पर मौली बांधी जाती है।
- पूजा-आराधना : दीपावली पूजा की शुरुआत धन्वंतरि पूजा से होती है। दूसरा दिन यम, कृष्ण और काली की पूजा होती है। तीसरे दिन लक्ष्मी माता के साथ गणेशजी की पूजा होती है। चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है और अंत में पांचवें दिन भाईदूज या यम द्वीतिया मनाई जाती है।

- मजेदार पकवान : दीपावली के 5 दिनी उत्सव के दौरान पारंपरिक व्यंजन और मिठाई बनाई जाती है। हर प्रांत में अलग-अलग पकवान बनते हैं। उत्तर भारत में ज्यादातर गुझिये, शकरपारे, चटपटा पोहा चिवड़ा, चकली आदि बनाते हैं।

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