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रुपया न्यूनतम स्तर पर, क्यों कमजोर हो रहा है रुपया? क्या होगा आम आदमी की जेब पर असर?

नई दिल्ली। करेंसी बाजार में विदेशी फंडों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। सोमवार को 1 डॉलर की कीमत 77.50 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि आज सुबह इसमें कुछ सुधार हुआ और सुबह करीब 11:30 बजे डॉलर 77.29 रुपए के स्तर पर था। - story of rupee and dollar id="ram"> Last Updated: मंगलवार, 10 मई 2022 (14:23 IST) नई दिल्ली। करेंसी बाजार में विदेशी फंडों की

  • Posted on 10th May, 2022 09:10 AM
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रुपया न्यूनतम स्तर पर, क्यों कमजोर हो रहा है रुपया? क्या होगा आम आदमी की जेब पर असर?   Image
Last Updated: मंगलवार, 10 मई 2022 (14:23 IST)
नई दिल्ली। करेंसी बाजार में विदेशी फंडों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से अमेरिकी के मुकाबले रुपए की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। सोमवार को 1 डॉलर की कीमत 77.50 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि आज सुबह इसमें कुछ सुधार हुआ और सुबह करीब 11:30 बजे डॉलर 77.29 रुपए के स्तर पर था।

कमजोर होता चला गया रुपया :
15 अगस्त 1947 में एक डॉलर की कीमत 4.16 रुपए थी।
इसके बाद डॉलर लगातार मजबूत होता चला गया और रुपए की स्थिति बेहद कमजोर हो गई। 1991 में खाड़ी युद्ध और सोवियत संघ के विघटन के कारण भारत बड़े आर्थिक संकट में घिर गया और डॉलर 26 रुपए पर पहुंच गया। 1993 में एक अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए 31.37 रुपए लगते थे। साल 2008 खत्म होते रुपया 51 के स्तर पर जा पहुंचा।

मोदी राज में रुपए का हाल : मोदी राज में भी रुपया करीब 17.31 रुपए महंगा हो गया। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की गिरती कीमत थमने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ रुपया डॉलर के मुकाबले 77.50 पर चुका है।
26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी ने एनडीए के प्रचंड बहुमत के बाद देश की बागडोर संभाली थी, उस समय डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत करीब 58.93 रुपए थी, जो पांच सालों के बाद में 73.79 के करीब पहुंच गई है। जनता ने मोदीजी को दूसरा मौका दिया लेकिन डॉलर की तेजी नहीं थमी। आज रुपया अपने अब तक के निचले स्तर पर है।

आइए जानते हैं रुपए के कमजोर होने का आम आदमी पर क्या असर होगा?
बढ़ेगी महंगाई : भारत बड़ी संख्या में अन्य देशों से सामान आयात करता है। रुपए के कमजोर होने से बाहर से आने वाला सामान महंगा हो जाएगा। क्रूड, इलेक्ट्रॉनिक सामान, उर्वरक समेत वे सभी वस्तुएं महंगी हो जाएगी, जो बाहर से आयात की जाती है।

कमजोर होते रुपए का सीधा असर पेट्रोलियम उत्पादों पर पड़ेगा। खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल प्रयोग होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेंगे। माल ढुलाई का असर आम आदमी से जुड़ी हर वस्तु होता है।
अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैम्पू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं।

महंगा होगा विदेश जाना : अगर आप विदेश घूमने जाने का प्लान कर रहे हैं या आपके परिवार का कोई सदस्य विदेश में पढ़ाई करने गया है या इलाज कराने गया है तो आपको पहले की अपेक्षा ज्यादा खर्च करना होगा। हां, अगर विदेश में जॉब करने वाला व्यक्ति भारत में अपने किसी रिश्तेदार को पैसे भेजेगा तो उसे फायदा होगा।
इन कंपनियों की आय बढ़ेगी : रुपया कमजोर होने से आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल कंपनियां आदि वे सभी कंपनियां फायदे में रहेगी जो वस्तुओं या सेवाओं को एक्सपोर्ट करती है। इन कंपनियों की आय डॉलर में होती है। इन कंपनियों की आय बढ़ेगी।

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