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षटतिला एकादशी व्रत रखने के 6 फायदे और तिल के 6 उपाय

Shattila Ekadashi 2022: 28 जनवरी वर्ष 2022 शुक्रवार को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी में तिल का और श्रीहरि विष्णु जी के पूजन का खासा महत्व है। आओ जानते हैं कि इस एकादशी पर वृत रखने के 6 फायदे और तिल के 6 ऐसे उपाय जो बहुत ही लाभकारी है। id="ram"> पुनः संशोधित बुधवार, 19 जनवरी 2022 (15:50 IST) Shattila Ekadashi 2022: 28 जनवरी वर्ष 2022 शुक्रवार को

  • Posted on 19th Jan, 2022 16:00 PM
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षटतिला एकादशी व्रत रखने के 6 फायदे और तिल के 6 उपाय   Image
पुनः संशोधित बुधवार, 19 जनवरी 2022 (15:50 IST)
Shattila 2022: 28 जनवरी वर्ष 2022 शुक्रवार को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी में तिल का और श्रीहरि विष्णु जी के पूजन का खासा महत्व है। आओ जानते हैं कि इस एकादशी पर वृत रखने के 6 फायदे और तिल के 6 ऐसे उपाय जो बहुत ही लाभकारी है।


व्रत रखने के 6 फायदे
1. षटतिला रखने से दुर्भाग्य का नाश, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।

2. तिल के 6 प्रयोग के कारण ही इसे षटतिला एकादशी नाम दिया गया है। आज के दिन तिल का प्रयोग 6 प्रकार से करने पर पापों का नाश होता है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है या मोक्ष की प्राप्ति होती है।

3. षटतिला एकादशी का व्रत करने से धन-धान्य और समृद्धि मिलती है। इस दिन तिल से भरा कलश दान करने से आपके भंडार भरे रहते हैं।

4. षटतिला एकादशी का व्रत करने से व्‍यक्ति को आरोग्‍य की प्राप्ति होती है। व्रत रखने से नेत्र के विकार भी दूर होने की मान्यता है।

5. इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति का वास होता है।
6. महिलाएं यह व्रत करती हैं तो उन्‍हें अखंड सौभाग्‍य की प्राप्ति होती है। यदि जोड़े से यह व्रत रखा जाता है तो दांपत्‍य जीवन सुखी होता है।

तिल के 6 प्रयोग

1. तिल स्नान : सबसे पहले तिल का प्रयोग जल में मिलाकर स्नान के लिए करते हैं। स्नान करने के बाद पीले कपड़े पहनते हैं। ऐसा करने से दुर्भाग्य का नाश होता है।

2. तिल का उबटन : दूसरा प्रयोग तिल का उबटन बनाकर करते हैं। इससे शरीर को लाभ मिलता है। आयोग्य की प्राप्ति होती है। इससे सर्दी के विकार दूर होते हैं।
3. तिल का हवन : पांच मुठ्ठी तिल से हवन करते हैं। हवन करते वक्त 108 बार ओम नमो भगवते वासुदेव मंत्र का जाप करें। इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

4. तिल का तर्पण : इसके लिए आप दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं और विधिवत रूप से तिल का पितरों के निमित्त तर्पण करें। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता और संकट दूर होते हैं।

5. तिल का भोजन : संध्या के समय तिलयुक्त भोजन बनाकर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी को भोग लगाकर उसका सेवन करें। इस दिन तिलयुक्त फलाहारी होना चाहिए। यह सभी तरह के शारीरिक संताप को समाप्त करके आरोग्य प्रदान करता है।
6. तिल का दान : महाभारत में उल्लेख मिलता है कि जो भी व्रती माघ माह में ऋषि-मुनि या गरीबों को तिल का दान करता है वह नरक के दर्शन नहीं करता है। माघ माह में जितने तिलों का दान करेंगे उतने हजार वर्षों तक स्वर्ग में रहने का अवसर प्राप्त होगा।

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