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सायबर-क्राइम सेफ़्टी, सिक्योरिटी एंड यूथ पर सेमिनार

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  • Posted on 22nd Sep, 2022 17:12 PM
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इंदौर। सायबर एक्सपर्ट गौरव रावल ने कहा कि इस आधुनिक डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमें साथियों और परिवारों से जुड़ने का एक मौका जरूर देता है, लेकिन इसके खतरों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। रावल ने छात्रों को सायबर क्राइम के विभिन्न कारणों और रोकथाम के बारे में बताया। सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छात्रों को सुरक्षा और गोपनीयता के पहलुओं को ठीक से समझाया। - Seminar on Cyber-Crime Safety, Security and Youth id="ram"> पुनः संशोधित गुरुवार, 22 सितम्बर 2022 (21:25 IST) हमें फॉलो करें इंदौर। सायबर

पुनः संशोधित गुरुवार, 22 सितम्बर 2022 (21:25 IST)
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इंदौर। सायबर एक्सपर्ट ने कहा कि इस आधुनिक डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमें साथियों और परिवारों से जुड़ने का एक मौका जरूर देता है, लेकिन इसके खतरों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालजी एण्ड रिसर्च (AITR) इंदौर कैंपस के स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस में 'सायबर-क्राइम सेफ़्टी, सिक्योरिटी एंड यूथ' विषय पर एक का आयोजन किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्तर पर सायबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट प्रो. गौरव रावल थे।

प्रो. रावल और AITR इंदौर के छात्रों के बीच एक दिलचस्प सवाल और जवाब सेशन संपन्न हुआ। उन्होंने विभिन्न एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर जैसे- ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और विभिन्न सामाजिक मीडिया प्लेटफार्मों के लिए निर्धारित आयु सीमा मानदंड तथा खर्च किए जाने वाले समय पर ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने छात्रों को सायबर क्राइम के विभिन्न कारणों और रोकथाम के बारे में बताया। सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छात्रों को सुरक्षा और गोपनीयता के पहलुओं को ठीक से समझाया। प्रो. गौरव ने स्पूफिंग, सायबरस्टॉकिंग, सायबरबुलिंग, फोटो मॉर्फिंग जैसे विषयों पर भी चर्चा की तथा छात्रों को भारत में सायबर कानून की विभिन्न धाराओं जैसे 66D, 66E व 66F के बारे में बताया तथा आईपीसी के तहत 354D, 507 व 509 का भी उल्लेख किया गया।

उन्होंने छात्रों से हाल के विषयों पर चर्चा की और ऑनलाइन एप्स की गोपनीयता नीति के बारे में संक्षिप्त में बताया, जिसके द्वारा सायबर चोरों तक आम लोगों

की महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचती है।

प्रो. रावल ने इस सत्र के माध्यम से छात्रों को सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली नकारात्मकताओं से अवगत कराया। जिसका उद्देश्य यह सिखाना था कि आभासी दुनिया में उपस्थिति को कैसे सुरक्षित किया जाए। रावल ने ऑनलाइन सुझावों के बाद छात्रों के सवालों का समाधान भी किया।

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