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23 जून 2022, गुरुवार के शुभ मुहूर्त

शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022 संवत्सर नाम-राक्षस अयन-उत्तरायण मास-आषाढ़ पक्ष-कृष्ण ऋतु-वर्षा वार-गुरुवार तिथि (सूर्योदयकालीन)-दशमी नक्षत्र (सूर्योदयकालीन)-रेवती योग (सूर्योदयकालीन)-अतिगण्ड करण (सूर्योदयकालीन)-वणिज लग्न (सूर्योदयकालीन)-मिथुन शुभ समय- 6:00 से 7:30, 12:20 से 3:30, 5:00 से 6:30 तक राहुकाल-दोप. 1:30 से 3:00 बजे तक दिशा शूल-दक्षिण योगिनी वास-उत्तर गुरु तारा-उदित शुक्र तारा-उदित चंद्र स्थिति-मेष व्रत/मुहूर्त-भद्रा/सर्वार्थसिद्धि योग/पंचक समाप्त यात्रा शकुन- बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें। आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:। आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर चढाएं । वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। - Muhurat 23 June 2022 id="ram"> पं. हेमन्त रिछारिया| हमें फॉलो करें आज आपका दिन मंगलमयी रहे, यही शुभकामना

  • Posted on 22nd Jun, 2022 13:21 PM
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23 जून 2022, गुरुवार के शुभ मुहूर्त   Image
आज आपका दिन मंगलमयी रहे, यही शुभकामना है। 'वेबदुनिया' प्रस्तुत कर रही है खास आपके लिए आज के दिन के विशिष्ट मुहूर्त। अगर आप आज वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं या आज कोई नया व्यापार आरंभ करने जा रहे हैं तो आज के शुभ मुहूर्त में ही कार्य करें ताकि आपके कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सकें। ज्योतिष एवं धर्म की दृष्टि से इन मुहूर्तों का विशेष महत्व है। मुहूर्त और चौघड़िए के आधार पर 'वेबदुनिया' आपके लिए प्रतिदिन के खास मुहूर्त की सौगात लेकर आई है।

प्रस्तुत हैं आज के मुहूर्त

शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
संवत्सर नाम-राक्षस
अयन-उत्तरायण
मास-आषाढ़
पक्ष-कृष्ण
ऋतु-वर्षा
वार-गुरुवार
तिथि (सूर्योदयकालीन)-दशमी
नक्षत्र (सूर्योदयकालीन)-रेवती
योग (सूर्योदयकालीन)-अतिगण्ड
करण (सूर्योदयकालीन)-वणिज
लग्न (सूर्योदयकालीन)-मिथुन
शुभ समय- 6:00 से 7:30, 12:20 से 3:30, 5:00 से 6:30 तक
राहुकाल-दोप. 1:30 से 3:00 बजे तक
दिशा शूल-दक्षिण

योगिनी वास-उत्तर
गुरु तारा-उदित
शुक्र तारा-उदित
चंद्र स्थिति-मेष
व्रत/मुहूर्त-भद्रा/सर्वार्थसिद्धि योग/पंचक समाप्त
यात्रा शकुन- बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर चढाएं ।
वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।

(निवेदन-उपर्युक्त विवरण पंचांग आधारित है पंचांग भेद होने पर तिथि/मुहूर्त/समय में परिवर्तन होना संभव है।)

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: [email protected]

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