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नागपंचमी के पावन पर्व पर कालेश्वर धाम नाग मंदिर में हुई विशेष पूजा

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  • Posted on 02nd Aug, 2022 08:36 AM
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इंदौर। श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर सुदामा नगर दिगंबर जैन मंदिर के पास स्थित कालेश्वर धाम के नाग मंदिर में विशेष पूजा हुई। यहां पर विगत 22 वर्षों से पूजा हो रही है। इस अवसार पर इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी दर्शन और पूजा का लाभ लिया। - Kaleshwar dham nag mandir indore id="ram"> पुनः संशोधित मंगलवार, 2 अगस्त 2022 (13:42 IST) हमें फॉलो करें इंदौर। श्रावण शुक्ल

पुनः संशोधित मंगलवार, 2 अगस्त 2022 (13:42 IST)
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इंदौर। श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर सुदामा नगर दिगंबर जैन मंदिर के पास स्थित कालेश्वर धाम के नाग मंदिर में विशेष पूजा हुई। यहां पर विगत 22 वर्षों से पूजा हो रही है। इस अवसार पर इंदौर ने भी दर्शन और पूजा का लाभ लिया।

धाम के संस्थापक श्री भैयाजी (मूलनिवासी उत्तराखंड) ने यहां पर चांदी की 6 फीट की कुंडली मारे बैठे नागराज की मूर्ति को बड़े ही विधि-विधान के साथ स्थापित किया है। इतनी बड़ी चांदी की प्रतिमा इंदौर शहर में कई अन्य नहीं है। भैयाजी स्वयं एक नाग देवता के उपासक हैं, व प्रतिवर्ष नागपंचमी को भव्य आयोजन किया जाता है।

नागपंचमी के शुभ अवसार पर प्रातः 7:00 बजे 51 जोड़ों के द्वारा मार्कण्डेय अनुष्ठान किया गया। इस मौके पर शहर के प्रथम नागरिक पुष्यमित्र भार्गव ने भी नाग देवता का दूध से अभिषेक किया और भैयाजी से आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही शहर की खुशहाली की कामना की। विशेष रूप से अनजान डर या भय मार्केश की दशा हेतु और सभी देशवासियों की लंबी आयु हेतु नाग देवता से प्रार्थना की गई।
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पूजा और प्रार्थना के पश्चात प्रातः 8:00 बजे से 10:00 बजे तक नाग देवता का अभिषेक दूध, केसर, फलों का रस, औषधि, जड़ी-बूटी, भस्म आदि अनेकाअनेक द्रव्य से वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया गया। इसके पश्चात फूल बंगला दर्शन और आध्यात्मिक समाधान, जिसमें कालसर्प योग पितृदोष, राहु-केतु से पीड़ित एवं अन्य जीवन की कठिनाइयों का बड़ा ही सरल व सुगम मार्ग बताया गया। इसके बाद नाग देवता की महाआरती की गई जिसमें कई श्रद्धालु शामिल हुए और उन्होंने अपने जीवन में खुशहाली की प्रार्थना की।

भैयाजी के अनुसार नागसेवा से स्वयं का मोक्ष संभव है क्योंकि अपने अंदर की कुंडलिनी भी इसी का प्रतीक है। यदि सात चक्र शुद्ध हो जाए और कुंडलिनी जागृत हो जाए तभी ईश्वर की प्राप्ति संभव है।


कालेश्वर धाम में अत्यंत शांतिदायक एवं कष्ट निवारण पावन परिसर में पारलौकिक मार्गदर्शन में अनेक भक्त लाभ ले चुके हैं। नाग देवता के आशीर्वाद से भैयाजी कालसर्प, पितृदोष का समुचित उपचार करते हैं। नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा दर्शन का बड़ा ही महत्व है इससे अपने अंदर की कुंडली के दोष, श्राप की मुक्ति सर्प पूजन दर्शन से मुक्ति मिलती है।
सर्प रूपी कुण्डलिनी जब शुद्ध होती है तो प्रत्येक व्यक्ति के कार्य सिद्ध होने लगते हैं। नागपंचमी और हर माह की पंचमी को नाग देवता के दर्शन कर अपने अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मक ऊर्जा पैदा कर सकते हैं। कालेश्वर धाम पर प्रात: से ही नागपंचमी पर लोगों का दर्शन हेतु भीड़ होने लगती है दूर-दूर से देश विदेश से भी लोग अपनी अपनी मनोकामना लेकर धाम पर भैयाजी से आशीर्वाद लेने आते हैं।

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