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24 फरवरी जानकी जयंती : माता सीता की पूजा-उपासना कैसे करें, जानिए मंत्र, चालीसा और उपाय

24 फरवरी जानकी जयंती : माता सीता की पूजा-उपासना कैसे करें, जानिए मंत्र, चालीसा और उपाय id="ram"> Janaki Jayanti निर्णय सिंधु पुराण के अनुसार- फाल्गुनस्य च मासस्य

  • Posted on 23rd Feb, 2022 08:45 AM
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Janaki Jayanti
निर्णय सिंधु पुराण के अनुसार-
फाल्गुनस्य च मासस्य कृष्णाष्टम्यां महीपते।
जाता दाशरथे: पत्‍‌नी तस्मिन्नहनि जानकी॥
अर्थात्- फाल्गुन कृष्ण अष्टमी के दिन प्रभु श्री राम की पत्नी जनकनंदिनी प्रकट हुई थीं। इसीलिए इस तिथि को सीता अष्टमी के नाम से जाना जाता है।

पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि को माता सीता धरती पर अवतरित हुए थी। इसीलिए इस दिन श्री जानकी जयंती (Janaki Jayanti 2022) या सीता जयंती पर्व मनाया जाता है। महाराज जनक की पुत्री विवाह पूर्व महाशक्तिस्वरूपा थी। माता सीता का विवाह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के साथ हुआ था। विवाह पश्चात वे राजा दशरथ की संस्कारी बहू और वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम के कर्तव्यों का पूरी तरह पालन किया।

माता सीता एक आदर्श पत्नी मानी जाती है। अपने दोनों पुत्रों लव-कुश को वाल्मीकि के आश्रम में अच्छे संस्कार देकर उन्हें तेजस्वी बनाया। इसीलिए माता सीता भगवान श्री राम की श्री शक्ति है। इसीलिए फाल्गुन कृष्ण अष्टमी का व्रत रखकर सुखद दांपत्य जीवन की कामना की जाती है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत महत्वपूर्ण है। यह व्रत एक आदर्श पत्नी और सीता जैसे गुण हमें भी प्राप्त हो इसी भाव के साथ रखा जाता है। शादी योग्य युवतियां भी यह व्रत कर सकती है, जिससे वह एक आदर्श पत्नी बन सकें।

जानकी जयंती के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर माता सीता की पूजा करती हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है एवं श्री राम-सीता का विधिपूर्वक पूजन करता है, उसे सोलह महान दानों का फल, पृथ्वी दान तथा समस्त तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है।

जानकी जयंती पर कैसे करें पूजन-Janaki Jayanti
Festival


* फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि के दिन सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान के प‍श्चात माता सीता तथा भगवान श्री राम की पूजा करें।

* राम-सीता की प्रतिमा पर श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।

* श्री राम को पीले और माता सीता को लाल वस्त्र पहनाएं।

- इस दिन राम-सीता की संयुक्त रूप से पूजन करें।

- तत्पश्चात आरती करें।

- माता जानकी की जन्म कथा पढ़ें।

- श्री राम तथा माता जानकी के मंत्रों का जाप करें।

- दूध-गुड़ से बने व्यंजन बनाएं और दान करें।

- शाम को पूजा करने के बाद इसी व्यंजन से व्रत खोलें।

मंत्र-Janaki Jayanti Mantra
-'श्री सीतायै नम:'
- ॐ जानकीवल्लभाय नमः
- 'श्रीसीता-रामाय नम:'
- श्रीरामचन्द्राय नम:।
- श्री रामाय नम:।
- श्री सीतायै नम:।

उपाय-Janaki Jayanti ke Upay

- अगर आपकी कोई खास मनोकामना पूर्ण नहीं हो रही हो तो जानकी जयंती या सीता अष्टमी के दिन रुद्राक्ष की माला से 'ॐ जानकी रामाभ्यां नमः' मंत्र का 1, 5, 11 या 21 मालाओं का जाप करें।

- जानकी जयंती का व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं के वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां खत्म होती हैं।

- सीता जयंती पर राम-सीता के पूजन से पति की आयु लंबी होती है।

- यदि किसी कन्या की शादी में अड़चनें आ रही हैं गंगा या तुलसी के पेड़ की मिट्टी लेकर राम-सीता की प्रतिमा बनाकर उसका पूजन करके सुहाग सामग्री चढ़ाकर अच्छे वर की प्रार्थना करें।

- जानकी जयंती के दिन राम-सीता की एक तस्वीर घर के पूजा स्थान में लाकर रखें तथा उसका प्रतिदिन पूजन करें। इस उपाय से पति-पत्नी के बीच चल रहा कलह दूर होकर मधुर संबंध बनेंगे।

- जानकी जयंती के दिन सीता-राम जी का एक साथ पूजन करके माता सीता की मांग में 7 बार सिंदूर लगाएं और वहीं सिंदूर हर बार अपनी मांग में लगाएं, इससे वैवाहिक जीवन सुखमय हो जाता है।

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