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जगन्नाथ मंदिर से मिले महाविनाश के संकेत, क्या होगा भविष्य में?

Achyutanand Bhavishya Malika Predictions: 16वीं सदी के संत अच्युतानंददास ने 500 वर्ष पहले कलयुग के अंत, महाविनाश और उसके बाद नए युग की कई भविष्यवाणियां की है। वर्तमान में उनके द्वारा लिखी पुस्तक 'भविष्य मालिका' की भविष्‍यवाणियां वायरल हो रही है, जिसमें यह बताया गया है कि जिस दिन जगन्नाथ मंदिर में निम्नलिखित घटनाएं घटेगी तो समझ लेना की कलयुग का अंत हो गया है और अब महानिवाश प्रारंभ होगा। आओ जानते हैं कि उन्होंने क्या संकेत दिए हैं। - Jagannath Mandir Ke Sanket id="ram"> पुनः संशोधित शुक्रवार, 13 मई 2022 (13:39 IST) Achyutanand Bhavishya Malika Predictions: 16वीं सदी के संत

  • Posted on 13th May, 2022 08:25 AM
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पुनः संशोधित शुक्रवार, 13 मई 2022 (13:39 IST)
Achyutanand Bhavishya Malika Predictions: 16वीं सदी के संत अच्युतानंददास ने 500 वर्ष पहले कलयुग के अंत, महाविनाश और उसके बाद नए युग की कई भविष्यवाणियां की है। वर्तमान में उनके द्वारा लिखी पुस्तक 'भविष्य मालिका' की भविष्‍यवाणियां वायरल हो रही है, जिसमें यह बताया गया है कि जिस दिन जगन्नाथ मंदिर में निम्नलिखित घटनाएं घटेगी तो समझ लेना की कलयुग का अंत हो गया है और अब महानिवाश प्रारंभ होगा। आओ जानते हैं कि उन्होंने क्या संकेत दिए हैं।


जगन्नाथ पुरी मंदिर से मिलते हैं भविष्य के संकेत (Signs of the future meet from Jagannath Puri temple):


1. जगन्नाथजी का अपमान : जब भगवान जगन्नाथ का अपमान होगा, मंदिर की परंपराओं में अव्यवस्था होगी। जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष नवकलेवर की रस्म होती है। इस रस्म में पुरानी मूर्तियों को बदलकर नई मूर्तियां स्थापित की जाती है। कहते हैं कि 1996 के बाद 2015 में इस रस्म को लेकर पुजारियों में झगड़ा हो गया था। जिसकी वजह से यह रस्म देरी से हुई। ओड़िशा में कई लोगों ने इसे भगवान जगन्नाथ के अपमान और परंपराओं को खंडित करने के तौर पर देखते हैं। इसके बाद यहां की अव्यवस्था सभी के सामने उजागर हुई।
2. गुंबद के पत्‍थर : जगन्नाथ पुरी मंदिर के गुंबद से नीचे पत्थर गिरेंगे। कहते हैं कि वर्ष 1842 से लेकर अब तक लगभग 15 से 16 बार जगन्नाथ पुरी से पत्थर गिरने की घटना हो चुकी है।

3. बरगद का पेड़ : ओड़ीसा में चक्रवाती तूफान से जगन्नाथ मंदिर का कल्पवृक्ष यानी पवित्र बरगद का पेड़ गिर जाएगा और इसके बाद दुनिया में लाखों लोग मरने लगेंगे। ओड़िसा में मई 2019 में फानी नाम का एक तूफान आया था जिसमें यह बरगद का पेड़ गिर गया था। उन्नीस के अंत में ही करोना महामारी का प्रकोप प्रारंभ हुए था और लोगों के मरने का सिलसिला प्रारंभ हो गया।
Jagannath puri and Dwarkadhish temple
4. ध्वज का गिरना : जगन्नाथ मंदिर का झंडा कई बार गिरेगा और एक चक्रवाती तूफान के कारण झंडा समुद्र में जा गिरेगा। मई 2019 में चक्रवाती तूफान फानी के कारण यह घटना घट चुकी है। इसके बाद मई 2020 में भी यह घटना घट चुकी है।

5. नीलचक्र का टेड़ा होना : जगन्नाथ मंदिर का नीलचक्र यानी सुदर्शनचक्र तूफान से टेड़ा हो जाएगा। मई 2019 में समुद्री तूफान फानी के कारण यह विशालकाय चक्र टेड़ा हो गया था।

6. ध्वज का जलना : जगन्नाथ पुरी के मंदिर के ध्वज में आग लग जाएगी। 19 मार्च 2020 को पापनाशक एकादशी के दिन मंदिर के परिसर में महादीप लगाया गया था। अचानक हवा चलने से ध्वज उड़कर महाद्वीप के पास चला आया और उसमें आग लग गई। उस समय इसे बहुत बड़ा अनिष्ट माना गया था। उसके पांच दिन बाद देश में पहला लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद ही भारत में दूसरी लहर का ऐसा मंजर देखा गया जिसने त्राही मचा दी थी। चारों तरफ चिताएं जल रही थीं।
7. त्रिदेव के वस्त्र : मंदिर परिसर में त्रिदेव के ऊपर जो कपड़ा है उसमें आग लग जाएगी। मंदिर परिसर में यह घटना भी कई बार हो चुकी है।

8. गिद्धा का गुंबद पर बैठना : मंदिर के शिखर पर और एकाश्म स्तंभ पर गिद्ध बैठेगा। कहते हैं कि जगन्नाथ मंदिर के शिखर के आसपास कभी भी किस पक्षी को उड़ता नहीं देखा गया और न ही इसके आसपास कोई प्लेन या हेलिकॉफ्टर उड़ाया जाता है। लेकिन मंदिर के उपर जुलाई 2020 और इसके बाद दिसंबर 2021 में गिद्ध, चील और बाज‍ दिखाई दिए। मंदिर के शिखर, ध्वज, एकाश्म स्तंभ और नीलचक्र पर ये पक्षी बैठे हुए दिखाई दिए थे।

9. रक्त का धब्बे : जगन्नाथ के मंदिर में बार-बार रक्तपात होगा, खून के धब्बे मिलेंगे। यह घटना भी घट चुकी है। मंदिर परिसर में बार बार खून के धब्बे मिल रहे हैं। कभी झगड़ों के कारण तो कभी किसी अन्य रहस्यमयी वजह के चलते खून के धब्बे देखे गए। कई बार मंदिर का शुद्धिकरण करके महानुष्ठान किया गया है।

उपरोक्त सभी भविष्वाणियां सत्य हो गई हैं। इसका मतलब यह कि कलयुग का अंत आ चुका है और विनाश का समय अब प्रारंभ होगा।
डिस्क्लेमर : वायरल हो रही उपरोक्त भविष्यवाणियों का प्रमाण हम नहीं दे सकते और न ही इसकी पुष्टि कर सकते हैं। उनकी इन भविष्यवाणियों को कई लोग तोड़-मरोड़ कर भी पेश करते हैं और अपने तरीके से भी प्रचारित कर रहे हैं। हम नहीं जानते हैं कि इसमें कितनी सचाई है। आप अपने विवेक से काम लें।

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