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भारत जल्द ही चीन को देगा एक और झटका, 5G नेटवर्क से दूर रह सकती हैं Huawei और ZTE

भारत ने इस साल की शुरुआत में Huawe को  5G ट्रायल के लिए अनुमित दे दी थी। लेकिन मई महीने में भारत और चीन की सीमा पर हुए तनाव और 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद चीन के प्रति देश में काफी गुस्सा है। इसके चलते देशभर में बायकॉट चाइना की मुहीम चल रही है। केंद्र सरकार ने देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा बताते हुए 59 चाइनीज ऐप को जून में बैन कर दिया था जिसमें TikTok जैसी ऐप भी शामिल थी। चीन और भारत के बीच सीमा पर चल रहे तनाव के चलते Huawei Technologies और ZTE भारत के 5G नेटवर्क प्लान से बाहर

  • Posted on 04th Sep, 2021 06:22 AM
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चीन और भारत के बीच सीमा पर चल रहे तनाव के चलते Huawei Technologies और ZTE भारत के 5G नेटवर्क प्लान से बाहर किया जा सकता है। भारत ने बीते 23 जुलाई को इंवेस्टमेंट (निवेश) के को लेकर नियमों में नए संसोधन को लागू किया था। इसके मुताबिक, भारत की सीमा से लगने वाले देश को भारत में निवेश के लिए केंद्र से मंजूरी लेनी आवश्यक होगी। ऐसे में चीनी कंपनियों की भारत में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। Also Read - OPPO ने शोकेस किया नेक्स्ट जेनरेशन अंडर-स्क्रीन कैमरा (USC)

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने 5G ट्रायल के लिए प्राइवेट कंपनियां जैसे एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडियो को मंजूरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। कोरोनावायरस के संक्रमण के चलते देश में लगे लॉकडाउन के चलते 5G ट्रायल की मंजूरी प्रक्रिया में देरी हुई थी। हुवावे और जेडटीई के चीन के सरकार के साथ लिंक होने के चलते भारत समेत अमेरिका, यूनाईटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया ने इन कंपनियों को बैन करने का फैसला लिया है। अमेरिका की फेडरेल कॉम्यूनिकेशन कमिशन ने इन दोनों कंपनियों को राष्ट्र के लिए खतरा बताया है। Also Read - ZTE Axon 30: अंडर-डिस्प्ले कैमरा वाला स्मार्टफोन सितंबर में ग्लोबली होगा लॉन्च, मिलेंगे जबरदस्त फीचर्स

संचार मंत्रालय से मिली जानकारियों के मुताबिक हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 5G नेटवर्क के लिए स्पेक्ट्रम की निलामी अगले साल तक हो सकती है। चीनी कंपनियों को बैन करने का ऐलान अगले दो हफ्तों में प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुमति मिलने के बाद किया जा सकता है। संचार मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यलय फिलहाल इस पर जल्दबाजी नहीं कर रहा है। हालांकि Huawei और ZTE ने फिलहाल इस बारे में कुछ नहीं कहा है। Also Read - Huawei P50 सीरीज हुई लॉन्च, Snapdragon 888 के साथ मिलेगा Kirin 9000 चिप का ऑप्शन

भारत ने इस साल की शुरुआत में Huawei को  5G ट्रायल के लिए अनुमित दे दी थी। लेकिन मई महीने में भारत और चीन की सीमा पर हुए तनाव और 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद चीन के प्रति देश में काफी गुस्सा है। इसके चलते देशभर में बायकॉट चाइना की मुहीम चल रही है। केंद्र सरकार ने देश की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा बताते हुए 59 चाइनीज ऐप को जून में बैन कर दिया था जिसमें TikTok जैसी ऐप भी शामिल थी।

बढ़ जाएगी कीमत

सिडनी स्थित इंटरनेशनल डाटा कॉर्प में एनालिस्ट निखिल बत्रा का कहना है कि टेलीकॉम इंफ्राटेक्चर किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है इसलिए सभी देश चाहते हैं कि वे बिजली और पानी की तरह उनपर कंट्रोल करें। उनका आगे कहना था कि इंडियान मार्केट इंफ्राटेक्चर और रेगूलेटरी समस्याओं के चलते जूझ रहा है। नेटवर्क इक्यूपमेंट (उपकरण) मार्केट काफी छोटा है। ऐसे में भारत में अपने इस निर्णय के चलते चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं SBICAP के रिसर्च हेड राजीव शर्मा का कहना है कि हुवावे और जेडटीई के दरवाजे बंद करने से भारत में 5G की कीमतें 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

रिलायंस दे सकता है चुनौती

Reliance चीनी कंपनी हुवावे को चुनौती दे सकता है। मुकेश अंबानी ने 15 जुलाई को रिलांयस जियो के 5G नेटवर्क के लिए अपनी इन हाउस टेक्नोलॉजी Jio Infocomm विकसित की है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी थी। उनका कहना था रिलायंस जियो को अपने प्रतिद्वंदी कंपनियों के विपरीत 5G में स्वीच करने के लिए ज्यादा खर्च करने करने की जरूरत नहीं है। इसके चलते वे चानी उपकरणों की खरीद और राजनीतिक विवाद से दूर हैं। यहीं कारण है कि वैश्विक कंपनियां रिलायंस जियो पर निवेश कर रही हैं।

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