Home / Articles / यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है जामुन, सेवन का यह तरीका है सही

यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है जामुन, सेवन का यह तरीका है सही

खानपान का लाइफस्‍टाइल पर बहुत अधिक फर्क पड़ता है। आपका हर तरीका आपकी लाइफस्‍टाइल तय करता है। जैसा आप खाएंगे वैसा आप सोचेंगे और काम करेंगे। वहीं आपके द्वारा खाई गई चीजें यूरिक एसिड में परिवर्तित हो जाती है। इसके बाद किडनी उसे फिल्‍टर करती है। और फिर बॉडी से बाहर निकालती है। लेकिन जब किडनी फिल्‍टर नहीं कर पाती है। तो वह शरीर में जमा होने लगता है। इस वजह से एडि़यों में तेज दर्द होने लगता है। महिलाओं में यह समस्‍या तेजी से बढ़ रही है। यूरिक एसिड बाहर नहीं निकलने पर पैरों में सूजन आने लगती है, किडनी फेल होना, किडनी में स्टोन होना, शुगर हाई होना जैसा खतरा बढ़ जाता है। id="ram"> खानपान का लाइफस्‍टाइल पर बहुत अधिक फर्क पड़ता है। आपका हर तरीका आपकी

  • Posted on 04th Sep, 2021 08:51 AM
  • 1212 Views
यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है जामुन, सेवन का यह तरीका है सही   Image
खानपान का लाइफस्‍टाइल पर बहुत अधिक फर्क पड़ता है। आपका हर तरीका आपकी लाइफस्‍टाइल तय करता है। जैसा आप खाएंगे वैसा आप सोचेंगे और काम करेंगे। वहीं आपके द्वारा खाई गई चीजें में परिवर्तित हो जाती है। इसके बाद किडनी उसे फिल्‍टर करती है। और फिर बॉडी से बाहर निकालती है। लेकिन जब किडनी फिल्‍टर नहीं कर पाती है। तो वह शरीर में जमा होने लगता है। इस वजह से एडि़यों में तेज दर्द होने लगता है। महिलाओं में यह समस्‍या तेजी से बढ़ रही है। यूरिक एसिड बाहर नहीं निकलने पर पैरों में सूजन आने लगती है, किडनी फेल होना, किडनी में स्टोन होना, शुगर हाई होना जैसा खतरा बढ़ जाता है।

जामुन का करें सेवन

शोध के मुताबिक यूरिक एसिड की वजह से जिंदगी पर बहुत अधिक असर पड़ता है। किडनी के साथ हार्ट डिजीज, डायबिटीज और स्‍ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसे कंट्रोल करने के लिए जामुन का सेवन करें। जामुन में एंटीऑक्सीडेंट
और विटामिन बी 12 होते हैं, जो यूरिक एसिड की मात्रा को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। हालांकि सर्दी -जुकाम का अधिक खतरा है तो जामुन का सेवन दिन में ही करें।

जामुन के अलावा अन्‍य फल

अगर जामुन नहीं मिलते हैं तो आप अन्‍य फल चेरी, नींबू, संतरे का भी सेवन कर सकते हैं। खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। विटामिन सी युक्‍त चीजें खाने से यूरिक एसिड से की मात्रा कम होती है। इससे लाइफ रिस्‍क का खतरा भी कम होगा।




Latest Web Story

Latest 20 Post