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आषाढ़ अमावस्या का क्या है महत्व, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और 10 उपाय

Ashadha amavasya: 14 जून 2022 से आषाढ़ माह का प्रारंभ हुआ था। आषाढ़ माह की अमावस्या 29 जून को है। इस अमावस्या का बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन के एक दिन पूर्व हलहारिणी भौमवती अमावस्या रहेगी। आओ जानते हैं इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और 10 उपाय। - Ashadha Amavasya ke upay id="ram"> पुनः संशोधित गुरुवार, 23 जून 2022 (16:23 IST) हमें फॉलो करें Ashadha amavasya: 14 जून 2022 से आषाढ़

  • Posted on 23rd Jun, 2022 11:06 AM
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Ashadha amavasya: 14 जून 2022 से आषाढ़ माह का प्रारंभ हुआ था। आषाढ़ माह की अमावस्या 29 जून को है। इस अमावस्या का बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन के एक दिन पूर्व हलहारिणी भौमवती अमावस्या रहेगी। आओ जानते हैं इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और 10 उपाय।


आषाढ़ अमावस्या का महत्व : आषाढ़ी अमावस्या को दान-पुण्य और पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कर्मों के लिए भी इसे विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन पवित्र नदी और तीर्थ स्थलों पर स्नान का कई गुना फल मिलता है।

शुभ मुहूर्त :

तिथि : 28 जून 2022 को 05:53:34 से अमावस्या प्रारंभ होगी और 29 जून 2022 को 08:23:03 पर अमावस्या समाप्त होगी।
ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:38 से 05:21 तक।
अमृत काल : सुबह 10:52 से 12:40 तक।
गोधुली मुहूर्त : शाम 07:07 से 07:31 तक।
योग : वृद्धि योग 29 जून प्रात: 08:50 तक इसके बाद ध्रुव योग प्रारंभ।

आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि :
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें।

- फिर स्नान के पूर्व जल को प्राणाम करें।
- स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
- अब किसी नदी या ताल के समक्ष सूर्यदेव को अर्घ्‍य अर्पित करें।
- पुष्प, फल, धूप, दीप, अगरबत्ती आदि चीजों से भगवान विष्णु और शिव-पार्वती जी तथा तुलसी का पूजन करें।
- इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण और पूजन करें।
- पूजन समाप्ति के बाद आरती करें।
- आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरण करें।
- प्रसाद वितरण के बाद चीटियों को आटा मिश्रित शकर खिलाएं, गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराएं।
- इसके बाद जरूरतमंद, गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन कराएं, तत्पश्चात स्वयं भोजन ग्रहण करें।
Amavasya 2022
आषाढ़ अमावस्या के 10 उपाय :

1. इस दिन पितृदोष से छुटकारा पाने के लिए पितरों के निमित्त तर्पण और पूजन करें।

2. इस दिन कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए नागबलि कर्म या पंचबलि कर्म करें।

3. इस दिन चंद्रदोष से मुक्ति हेतु चंद्रदेव की पूजा करें।

4. इस दिन सूर्य दोष से मुक्ति हेतु सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें।

5. पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें।

6. इस दिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसो के तेल का दीपक लगाएं और अपने पितरों को स्मरण करें। पीपल की 7 परिक्रमा लगाएं।

7. इस दिन ईशान कोण में गाय के दूध के घी का दीपक जलाएं। इससे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी। बत्ती के स्थान पर लाल रंगे धागे उपयोग करें।

8. आटे की गोलियां बनाएं और मछलियों को उन्हें खिलाएं। इससे धन संबंधी परेशानी समाप्तहोगी।

9. काले कुत्ते को तंदूरी रोटी पर घी लगाकर खिलाएं। इससे सभी तरह के संकट दूर होंगे।

10. श्रीहरि विष्णु की पूजा करें और नियमपूर्वक व्रत का पालन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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