13 घंटे से ज्यादा चली भारत-चीन के बीच 14वें दौर की सैन्य वार्ता

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नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को चीन के साथ 14वें दौर की सैन्य वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख में टकराव के शेष स्थानों से सैनिकों को शीघ्र पीछे हटाने पर जोर दिया। सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की ओर चुशुल-मोल्दो 'बार्डर प्वॉइंट' पर कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई। id="ram"> Last Updated: गुरुवार, 13 जनवरी 2022 (10:29 IST) नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को चीन के साथ 14वें दौर

Last Updated: गुरुवार, 13 जनवरी 2022 (10:29 IST)
नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को चीन के साथ 14वें दौर की सैन्य वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख में टकराव के शेष स्थानों से सैनिकों को शीघ्र पीछे हटाने पर जोर दिया। सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की ओर चुशुल-मोल्दो 'बार्डर प्वॉइंट' पर कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई।
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सूत्रों ने कहा कि बातचीत में मुख्य रूप से हॉट स्प्रिंग्स में सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। वार्ता सुबह 9.30 बजे शुरू हुई और यह शाम तक चली। वार्ता में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता ने किया जिन्हें लेह स्थित 14वीं कोर का नया कमांडर नियुक्त किया गया है। चीनी पक्ष का नेतृत्व दक्षिण शिंजियांग सैन्य जिले के चीफ मेजर जनरल यांग लिन ने किया।
भारतीय पक्ष ने 'देपसांग बल्ज' और डेमचोक में मुद्दों को हल करने समेत टकराव वाले शेष स्थानों पर जल्द से जल्द सेना को हटाने पर जोर दिया। 13वें दौर की वार्ता 10 अक्टूबर 2021 को हुई थी। यह वार्ता गतिरोध के साथ समाप्त हुई थी।
दोनों पक्ष इस वार्ता में कोई प्रगति हासिल करने में विफल रहे थे। भारतीय थलसेना ने वार्ता के बाद कहा था कि उनकी ओर से दिए गए रचनात्मक सुझाव पर चीनी पक्ष सहमत नहीं हुआ और न ही वह कोई आगे की दिशा में बढ़ने वाला कोई प्रस्ताव पेश कर सका। नए दौर की यह वार्ता ऐसे समय हुई, जब पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील इलाकों में चीन के पुल बनाने पर भारत ने कहा था कि यह इलाका पिछले 60 वर्षों से चीन के अवैध कब्जे में है।

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